उन्नाव पुलिस पर गंभीर आरोप, मुकदमों की जांच में लापरवाही का दावा
सोशल मीडिया पर आदरणीय का कहना क्या सही माना जाए
मुख्यमंत्री जी के आदेश व निर्देश जनपद उन्नाव पुलिस के लिए होते हैं हवा हवाई पुलिस प्रशासन ने ठान लिया नहीं मानेंगे कोई आदेश
जनपद उन्नाव
वर्षों से गंभीर धाराओं में थानों में पंजीकृत मुकदमों कि नहीं हो रही निष्पक्ष जांच
भूमाफियाओं व दबंग के खिलाफ नहीं की जाती कोई उचित कार्यवाही
उन्नाव। गंभीर धाराओं में पंजीकृत मुकदमो की विवेचना सालों नहीं कर पाते हैं पूरी। जिससे आरोपी अपराधी अपने मूंछों पर ताव दे शिकायतकर्ताओं को देते फिरते हैं जान से हाथ धोने की धमकी, जनपद उन्नाव की पुलिस इतनी सुस्त है कि गाय को भैंस और भैंस को गाय बनाने में तनिक भी समय नहीं लेती और विवेचक इसमें माहिर है। जहां मुकदमा नंबर 889/2025 थाना कोतवाली सदर उन्नाव जहां प्रथम के दो विवेचक द्वारा आरोपियों पर लगाए गए आरोप की प्रथम दृष्टियां सत्य साबित होते हुए कार्रवाई की जा रही थी वही कोतवाली सदर के वरिष्ठ एस एस आई नजर इमाम जी द्वारा गंभीर धाराओं में पंजीकृत मुकदमे की फाइल को अभियोजन पक्ष का हवाला देते हुए फाइल की तिलांजलि करते हुए एफ आर लगा कप्तान ऑफिस भेज दी गई। वहीं जब पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारियों को इस विषय की जानकारी दी गई उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुनः विवेचना हेतु थाना अचलगंज स्थानांतरण कर दी गई क्योंकि उक्त पत्रावली में जहां पुलिस विभाग के ही कुछ जनपद में तैनात सीओ कैडर के अधिकारी आरोपियों को बचाने हेतु वरदान दिए बैठे हैं और ऐसे में पुलिस की शिथिल कार्यप्रणाली के चलते जहां भू-माफिया का जनपद में आतंक है क्योंकि जब किसी पीड़ित के द्वारा गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया जाता है जिसके साथ उक्त समय के सरकारी पत्रावलियों में साक्ष्य स्वयं दर्ज होते हैं और किसी भी समय उन साक्ष्यों का सत्यापन किया जा सकता है परंतु जनपद की पुलिस ऐसा नहीं करती है। जब तक विवादित व उनके साक्ष्यों के ऊपर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आदेश पर आदेश कर उन्हें ठंडा ना कर दिया जाए और भूमाफिया विवादित संपत्ति को बेचकर अपना पल्ला झाड़ अपने को पाक साफ ना करें तब तक उन्नाव की पुलिस चीर निद्रा में सोया करती है। और रही बात किसी पीड़ित की तो अगर भूमाफियाओं ने अपने बाहुबल का उपयोग कर उसे निपटा दिया तो पुलिस के लिए और आसान हो जाता है की एफ आर लगाकर फाइल का निस्तारण कर दो और जो जान से गया उसे जाने दो। महोदय ऐसे ढुलमुल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्यों नहीं कोई उचित कार्रवाई की जाती है ताकि आम जनमानस को न्याय मिलने में कोई कठिनाई व परेशानी ना हो।
