लखनऊ से उज्जैन तक बच्चों का प्रदर्शन, स्कूल और पढ़ाई से जुड़े मुद्दों पर उठी आवाज

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देश में छात्र-छात्राओं के आंदोलनों के बाद अब स्कूली बच्चों में भी अपने अधिकारों और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर आवाज उठाने का सिलसिला तेज होता दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर मध्य प्रदेश के उज्जैन तक स्कूली बच्चे अपनी शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए।

लखनऊ में शिक्षकों की कमी को लेकर सड़क पर उतरे बच्चे
लखनऊ के पारा इलाके में स्कूली छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों ने सड़क पर उतरकर अपनी मांग रखी और करीब 15 मिनट तक यातायात प्रभावित रहा। बच्चों की मुख्य मांग स्कूल में शिक्षकों की कमी को दूर करने की थी।
छात्रों का कहना है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है। ऐसे में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर बच्चों ने अपना विरोध दर्ज कराया।

स्कूलों के विलय के बाद बढ़ रही दूरी की चुनौती
दूसरी ओर, स्कूलों के विलय और कुछ विद्यालयों के बंद होने के बाद कई इलाकों में बच्चों के सामने स्कूल तक पहुंचने की दूरी बढ़ने की समस्या भी सामने आ रही है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्कूल दूर होने से छात्र-छात्राओं के लिए रोजाना स्कूल पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
कई जगह छात्राओं को लंबी दूरी तय करके स्कूल जाना पड़ता है। सुनसान रास्तों, पगडंडियों, खेतों और जंगलों से होकर गुजरने की स्थिति में उनकी सुरक्षा भी एक गंभीर चिंता बन जाती है। यदि बच्चों को रोजाना 10 से 12 किलोमीटर तक आना-जाना पड़े, तो इसका असर उनकी नियमित पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

उज्जैन में स्कूल शिफ्ट करने के विरोध में छात्राओं का प्रदर्शन
मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी छात्राओं ने अपने स्कूल को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के अनुसार, छात्राओं का सरकारी स्कूल दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा है, जो मौजूदा स्थान से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है।
स्कूल की दूरी बढ़ने के विरोध में छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी।

शिक्षा तक पहुंच और सुरक्षा का सवाल
लखनऊ और उज्जैन की घटनाएं अलग-अलग स्थानीय समस्याओं से जुड़ी हैं, लेकिन दोनों मामलों में बच्चों की शिक्षा और उनकी बुनियादी जरूरतें केंद्र में हैं। एक ओर जहां शिक्षकों की कमी पढ़ाई को प्रभावित कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों की दूरी बढ़ने से बच्चों के लिए नियमित रूप से विद्यालय पहुंचना चुनौती बन सकता है।
इन घटनाओं ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि स्कूलों के विलय या स्थानांतरण जैसे फैसलों के दौरान बच्चों की सुविधा, दूरी और खासकर छात्राओं की सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।
स्कूली बच्चों का इस तरह अपनी समस्याओं को लेकर सामने आना यह भी दिखाता है कि नई पीढ़ी अब अपनी शिक्षा और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर मुखर हो रही है।

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