राम मंदिर में पहली बार सावन शुक्ल तृतीया से झूलनोत्सव, 15 अगस्त से होगी शुरुआत
498 साल बाद बदलेगी राम मंदिर की परंपरा, पहली बार सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे रामलला।
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस वर्ष सावन झूलनोत्सव नई परंपरा के साथ मनाया जाएगा। करीब 498 साल बाद रामलला पहली बार नाग पंचमी के बजाय सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे।
15 अगस्त की शाम 7 बजे से झूलनोत्सव की शुरुआत होगी। 12 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव राम मंदिर में अब तक के सबसे भव्य आयोजनों में शामिल होगा। पहली बार रामलला के झूलनोत्सव का लाइव प्रसारण करने की भी तैयारी की जा रही है। जिससे देश-दुनिया के श्रद्धालु इस आयोजन के साक्षी बन सकेंगे। सावन में रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। पिछले तीन दिनों में करीब 3 लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं।
7 अगस्त को करीब 91 हजार, 8 अगस्त को करीब 1.15 लाख और 9 अगस्त की शाम 7 बजे तक लगभग 97 हजार श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था को और व्यवस्थित करने के लिए आचार्य इंद्रदेव मिश्र को धार्मिक अनुष्ठानों का व्यवस्थापक नियुक्त किया गया है। धार्मिक समिति ने मंदिर परिसर के सभी 18 मंदिरों की पूजा व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। समिति ने पुजारियों की संख्या, पूजा-अनुष्ठानों और धार्मिक परंपराओं के निर्वहन की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
इतिहास के अनुसार वर्ष 1528 में बाबर के सेनापति मीर बाकी द्वारा राम जन्मभूमि स्थित प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर वहां बाबरी ढांचा बनाए जाने के बाद यह स्थल लंबे समय तक संघर्ष और न्यायिक विवाद का केंद्र रहा
वर्ष 1992 के बाद रामलला अस्थायी टाट के मंदिर में विराजमान रहे और सुरक्षा व कानूनी प्रतिबंधों के कारण पारंपरिक धार्मिक आयोजनों का स्वरूप सीमित रहा। अब भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद धार्मिक परंपराओं को नए और व्यवस्थित स्वरूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस बार का झूलनोत्सव इसी बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
