भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी गौशालाएं, तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही गौ माताएं
जिम्मेदार अधिकारियों ने ओढ़ी निलजता की चादर
जिले में भ्रष्टाचार चरम पर
नेता अपने एशो-आराम पर
आम नागरिक से लेकर पशु तक त्राहि त्राहि
गौशालाओं में देवी तुल्य गौ माताएं तड़प तड़प कर तोड़ रही दम
जनपद के किसी भी गौशाला में पशुओं के लिए नहीं है कोई उचित व्यवस्था।
सिर्फ कागजों वह भुगतान तक ही सिमट कर रह जाती है उचित व्यवस्था। प्रत्येक आवारा पशु का चारा व उनकी देखरेख का होता है बंदर बांट। जिले के नेताओं का भी होता है उसमें अपना-अपना अंश।
तो कहां मिले गौ माता को चारा
अफसोस तो तब होता है कि जो जांच करने अधिकारी जाते हैं उनके स्वयं के कार्यों की जांच होना पहले आवश्यक होता है तो वह दूसरे की क्या जांच करेंगे और क्या अपने उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट देंगे।
