सावन में पर्यावरण और आस्था का संदेश, यूपी विधान परिषद में वितरित किए गए रुद्राक्ष के पौधे

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लखनऊ- सावन मास के पावन अवसर पर माननीय श्री मानवेंद्र सिंह, सभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के करकमलों द्वारा समस्त माननीय विधान परिषद सदस्यों को भगवान शिव के पावन प्रतीक रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया गया।
रुद्राक्ष एक विशाल, पवित्र, सदाबहार एवं चौड़ी पत्तियों वाला वृक्ष है, जिसका वैज्ञानिक नाम Elaeocarpus ganitrus है। यह हिमालय की तराई, नेपाल तथा दक्षिण-पूर्व एशिया का मूल निवासी है। प्राकृतिक रूप से यह 18-24 मीटर तक ऊँचा होता है, किंतु इसे गृह उद्यान अथवा आँगन में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। इसकी पत्तियाँ चमकदार हरी तथा पुष्प छोटे, सफेद एवं सुगंधित होते हैं। इसके गोलाकार हरे फल पकने पर आकर्षक नीले रंग के हो जाते हैं, जिनके भीतर रुद्राक्ष का पवित्र बीज होता है। उपयुक्त जलवायु एवं देखभाल में यह 3-4 वर्ष में फल देना प्रारम्भ कर देता है तथा प्रति वर्ष लगभग 1,000-2,000 फल उत्पन्न कर सकता है।
रुद्राक्ष का वृक्ष गर्म, आर्द्र एवं उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी वृद्धि करता है। 25°C-30°C तापमान, जल निकास वाली दोमट एवं जैविक पदार्थों से समृद्ध मिट्टी इसके लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। प्रारम्भिक अवस्था में इसे अप्रत्यक्ष प्रकाश तथा परिपक्व होने पर पूर्ण सूर्यप्रकाश उपयुक्त रहता है।
रुद्राक्ष’ शब्द संस्कृत के ‘रुद्र’ अर्थात भगवान शिव तथा ‘अक्ष’ अर्थात नेत्र/अश्रु से मिलकर बना है। पौराणिक मान्यता के अनुसार रुद्राक्ष वृक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के करुणा-स्वरूप अश्रुओं से हुई। इसके बीजों पर प्राकृतिक रूप से 1 से 21 मुख पाए जाते हैं, जिनका वैदिक परंपरा में विशेष आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व है।

रुद्राक्ष का पौधा दिव्य एवं सकारात्मक ऊर्जा, शांति, प्राकृतिक वायु शुद्धिकरण तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। इसके पवित्र बीजों का उपयोग विश्वभर में जप, ध्यान, योग एवं आध्यात्मिक साधना के लिए किया जाता है।

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