“देश हमारा, धरती अपनी, कानून उनका” — क्या यही नया भारत है?

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नई दिल्ली – देश हमारा, धरती अपनी, क़ानून उनका एक पड़ोसी होने के नाते तालिबान मंत्री का स्वागत तो ठीक है, लेकिन यहाँ उनका क़ानून चलेगा, या हमारा ? हमारा देश लैंगिक भेदभाव नहीं करता। हमारा संविधान सबको सामान अधिकार और अवसर देता है।महिला पत्रकारों से उनका धर्म भ्रष्ट होता है, तो हमारी सरज़मी पर संवाददाता सम्मेलन ही न करें। कभी मोरारजी देसाई मुंबई अब गुजरात, तब महाराष्ट्र मुंबई प्रान्त ही कहलाता था , के मुख्य मंत्री के नाते राज्य में कठोर नशा बंदी क़ानून लागू किये थे।शक्ति शाली मित्र सोवियत संघ के प्रधानमंत्री भारत दौरे पर दो दिन के वास्ते मुंबई आये।वहां के मुख्यमंत्री होने के नाते देसाई ने उन्हें कार से उनके होटल छोड़ा, और चलते वक़्त उनकी ज़ेब में शराब पीने की अनुमति का परमिट डाल कर बोले, इसके बगैर पीने पर यहाँ पुलिस उठा ले जाती है, चाहे कोई भी हो।आभार व्यक्त करते हुए और परमिट लौटाते हुए मुख्य अतिथि ने उत्तर दिया, धन्यवाद। मुझे यह पता था। इसलिए मैं यहाँ दो दिन तक बगैर शराब पिये रहने का मन बना कर आया हूं।क्या यह वही देश है।

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