लाखों साल पुराने शैलचित्रों की कहानी बोलेगी अब विज्ञान की ज़ुबानी
बीएचयू की टीम के सर्वे में सोनभद्र से मिर्जापुर-चंदौली के साथ ही बिहार के कैमूर जिले तक शैलचित्रों की एक बड़ी शृंखला सामने आई है। कई जगहों पर लघु पाषाणीय उपकरण भी पाए गए हैं। 3600 ईसा पूर्व से लेकर 25 लाख वर्ष पूर्व तक का इतिहास संजोये प्रागैतिहासिक काल की गुफाओं-भित्ति चित्रों की चमक समय की मार ने भले धुंधली कर दी है लेकिन गहराई से शोध किया जाए तो पाषाण युग से जुड़ीं अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
