पुराने मोबाइल के बदले बर्तन लेना पड़ा भारी, अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़
पुराना, टूटा या बेकार मोबाइल फोन फेरीवाले को बर्तनों के बदले देना अब एक बड़ा खतरा बन सकता है। उत्तर प्रदेश और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का खुलासा हुआ है, जो पुराने मोबाइल के जरिए लोगों का निजी डेटा चोरी कर करोड़ों की ठगी कर रहा था।
क्या है पूरा मामला?
मामले का खुलासा तब हुआ जब मिर्जापुर के लालगंज क्षेत्र में 16 मार्च की रात पुलिस ने एक ट्रक पकड़ा। ट्रक में 11,605 पुराने मोबाइल फोन भरे थे, जिनकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपये आंकी गई। पूछताछ में आरोपियों ने कटिहार निवासी इस्तार आलम का नाम बताया, जिसके बाद बिहार STF और यूपी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
कैसे काम करता था गिरोह?
इस्तार आलम ने देश के कई राज्यों में फेरीवालों का नेटवर्क बना रखा था। ये लोग गली-मोहल्लों में घूमकर पुराने मोबाइल के बदले बर्तन या प्लास्टिक सामान देते थे।
इकट्ठा किए गए मोबाइल ट्रकों के जरिए कटिहार भेजे जाते थे, जहां इनके मदरबोर्ड निकालकर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों को बेचे जाते थे।
मदरबोर्ड में ही फोन का पूरा डेटा सुरक्षित रहता है—जैसे फोटो, कॉन्टैक्ट, पासवर्ड और बैंक डिटेल्स—जिसे हैकर्स रिकवर कर लेते थे।
विदेशों तक फैला नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह गिरोह चीन और बांग्लादेश के साइबर ठगों से जुड़ा था। ये ठग कंबोडिया, मलेशिया और म्यांमार जैसे देशों में बैठकर बड़े साइबर फ्रॉड ऑपरेट करते हैं।
साथ ही, भारत के कुख्यात साइबर अपराध केंद्र जामताड़ा तक भी ये मदरबोर्ड सप्लाई किए जाते थे।
जांच में पता चला कि यह कारोबार करोड़ों रुपये का था। गिरोह के एक कथित मजदूर के बैंक खाते में दो साल में 45 लाख रुपये का लेन-देन मिला, जिससे पूरे नेटवर्क की बड़ी कमाई का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कैसे रहें सुरक्षित?
अनजान फेरीवालों को कभी भी अपना पुराना मोबाइल न दें
फोन बेचते समय खरीदार की पहचान (आधार आदि) जरूर लें
लिखित रसीद बनाएं और IMEI नंबर दर्ज करें
फोन को पूरी तरह फैक्ट्री रिसेट करें
केवल अधिकृत या विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर ही फोन बेचें
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला
यह सिर्फ ठगी नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। नागरिकों का निजी डेटा विदेशों तक पहुंचना बड़े खतरे का संकेत है।
पुलिस की इस कार्रवाई ने जहां एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, वहीं यह भी साफ किया है कि डिजिटल दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
